Sunday, 19 July 2015

सीखो


पुस्तक कहती हैं, पढ़ना सीखो, 
मौसम चाहे हो जाड़ा या गर्मी, पढ़कर आगे बढ़ना सीखो। 
जीवन कहता हैं, जीना सीखो, 
पल अमूल्य कहलाता हैं, नहीं लौट कर आता हैं इसलिय जीने में भी रहना सीखो। 
सूरज कहता हैं, चढ़ना सीखो, 
चाहे हो चुनौतियां जितनी जटिल, उचे पथ पर हस्ते हुए बढ़ना सीखो। 
नदियां कहती हैं, बेहना सीखो,
अपनी अंतरात्मा  को सुनकर, अपनी राहे चुनना सीखो । 
रंग कहते हैं, रंगना सीखो,
अलग अलग रंगो में भी, प्रकृति रंगकर मिलना - जुलना सीखो। 
फूल कहते हैं, खिलना सीखो,
अपनी अपेछा खुद से रख कर, खुद के अंदर को तराश चारो ओर मेहक्ना सिखो।  
कोयल कहती हैं, गाना सीखो,
अपने पर भरोसा रख, बीता जो भी अच्छा या बुरा से सीख, अभी में  मुस्कराना सीखो।


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